माँ का प्यार

                               माँ का प्यार
एक औरत थी , जो अंधी थी । जिसके कारण उसके बेटे को स्कूल में बच्चे चिढ़ाते अंधी का बेटा आ गया । हर बात पर उसे शब्द सुनने को मिलता था । ' ' कि अंधी का बेटा आ गया । इसलिए वह अपनी माँ से चिढ़ता था । उसे कहीं भी अपने साथ लेकर जाने में हिचकता था । उसे नापसंद करता था ।

उसकी माँ ने उसे पढ़ाया और उसे इस लायक बना दिया कि वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके । लेकिन जब वह बड़ा आदमी । बन गया तो अपनी माँ को छोड़ कर अलग रहने लगा । एक दिन एक बुढी औरत उसके घर आई और गार्ड से बोली । मुझे तुम्हारे साहब से मिलना है । जब गार्ड ने अपने मालिक से बोला तो मालिक ने कहा कि बोल दो । मैं अभी घर पर नहीं है । गार्ड ने जब बुढ़िया से बोला कि वो अभी नहीं हैं । तो वहाँ से बुढिया चली गई । ।

थोड़ी देर बाद जब लड़का अपनी कार से ऑफिस के लिए जा रहा होता है . . . तो देखता है कि सामने बहुत भीड़ लगी है , और जाने के लिए कि वहाँ क्यों भीड़ लगी है । वह वहाँ गया तो देखा कि उसकी माँ भरी पड़ी थी । उसने देखा कि उसकी मुट्ठी में कुछ है । उसने जब मुट्ठी खोली तो देखा कि एक लेटर जिसमें यह लिखा था कि बेटा जब तू छोटा था तो खेलते वक्त तेरी आँख में सरिया घस गई थी और तू अंधा हो गया था । तो मैंने तुम्हें अपनी आँख दे दी थी । इतना पढ़कर लड़का जोर - जोर से रोने लगा । उसकी माँ अब वापस नहीं आ सकती थी । दोस्तों वक्त रहते ही लोगों का सम्मान करना सीखो । माँ बाप का कर्ज हम कभी नहीं चुका सकते । हमारी प्यास का अंदाज भी अलग है । दोस्तों कभी समंदर को ठुकरा देते हैं । तो कभी आँसू तक पी जाते हैं । बैठना भाईयों के बीच , चाहे " वैर " ही क्यों न हो और खाना मां के हाथों का , चाहे जहर ' ' क्यों ना हो . . . . ( ऐसी होती है माँ )

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