बेटी बचाओ बेटी पढाओ

  बेटी  बचाओ बेटी पढ़ाओं 
कहती है बेटी हमें निहार
 मुझे चाहिए प्यार दुलार ।
बेटियों को क्यों
 प्यार नहीं करता संसार ।

सोचिये सभी क्या बेटी बिना
 बन सकता है घर परिवार ।
बचपन से लेके जवानी तक
मुझ पर लटक रहा तलवार

मेरे दर्द और वेदना का
कब होगा स्थाई उपचार ।
बढ़ते पानी में मैं बह गई
कौन करेगा नदी के पार ।

मैं बेटी माता भी मैं हूँ ।
मैं ही दुर्गा काली अवतार ।
 मेरे प्यार में सभी सुखी हैं ।
 मेरे बिना धरती अंधियार ।

बेटी का दर्द और वेदना का
कब होगा स्थाई उपचार ।

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