मेरे प्यारे पापा!

                                  पिता
जब मम्मी डाँट रही थीं तो कोई चुपके से हँस रहा था , वो थे पापा , जब मैं सो रही थीं , तब कोई चुपके से सिर पर हाथ फिरा रहे थे वे थे पापा । जब मैं सुबह उठी तो कोई बहुत थक कर भी काम पर जा रहे थे , वे थे पापा । खुद कड़ी धूप में रह कर कोई मुझे ए . सी . में सुला रहे थे , वो थे पापा । सपने तो मेरे थे , पर उन्हें पूरा करने का रास्ता कोई और बताए जा रहे थे , वे थे पापा । मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में हँसती रही पर मेरी हँसी देखकर कोई अपने गम भुलाए जा रहे थे वो थे पापा । फल खाने की ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी , पर कोई मुझे आम खिलाए जा रहे थे , वो थे । पापा । खुश तो मुझे होना चाहिए कि वो मुझे मिले , पर मेरे जन्म लेने की खुशी कोई और मनाए जा रहे थे , वे थे पापा । ये दुनिया पैसों से चलती है पर कोई सिर्फ मेरे लिए पैसे कमाए जा रहे थे , वो थे पापा । घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं , पर कोई बिना दिखाए भी इतना प्यार किए जा रहे थे , वो थे पापा । मै तो नौकरी के लिए घर से बाहर जाने पर दुखी थी , पर मुझसे भी आधक है कोई बहाए जा रहे थे पापा । मैं अपने ' ' बेटी ' ' शब्द को सार्थक बना सका नहीं पता नहीं पर कोई बिना स्वार्थ के अपने ' पिता ' शब्द का मेरे प्यारे पापा ! रहे थे वो थे पापा ।

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